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बड़ी खबर: 90 हजार लिए, फिर भी बना दिया शराब का केस!, गरियाबंद आबकारी विभाग पर लगा आरोप, कार्यशैली पर भी उठे बड़े सवाल

ताज़ा घटनाक्रम / मुख्य विवरण: सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, – आबकारी वृत्त गरियाबंद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम...

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StreamRise Media Desk

विशेष संवाददाता

बड़ी खबर: 90 हजार लिए, फिर भी बना दिया शराब का केस!, गरियाबंद आबकारी विभाग पर लगा आरोप, कार्यशैली पर भी उठे बड़े सवाल

बड़ी खबर: 90 हजार लिए, फिर भी बना दिया शराब का केस!, गरियाबंद आबकारी विभाग पर लगा आरोप, कार्यशैली पर भी उठे बड़े सवाल — फ़ाइल फ़ोटो / ग्लोबल न्यूज़ इंडिया वायर।

ताज़ा घटनाक्रम / मुख्य विवरण: सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, – आबकारी वृत्त गरियाबंद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम केवटाडीह, थाना छुरा निवासी धनुराम के पिता रामसिंग मांझी, जो दिव्यांग बताए गए हैं, ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर आबकारी विभाग के एक कर्मचारी पर शराब का प्रकरण बनाने की धमकी देकर 90 हजार रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष पड़ताल और रकम वापस दिलाने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, जुलाई 2026 में आबकारी विभाग के एक अधिकारी द्वारा शराब का प्रकरण बनाने की धमकी दी गई। आरोप है कि 7999574565 नंबर से फोन कर कार्रवाई से बचाने के नाम पर 90 हजार रुपये लिए गए और प्रकरण नहीं बनाने का भरोसा दिलाया गया।

मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि: शिकायतकर्ता का दावा है कि एक्शन के डर से परिवार से पैसे मांगने के अलावा सोने-चांदी के आभूषण तक बेचकर रकम जुटानी पड़ी। आरोप है कि रकम देने के बावजूद 9 सितंबर 2026 को आबकारी अधिनियम की धारा 36 के तहत न्यायालय में इस्तगासा पेश कर दिया गया। शिकायत में यह भी जानकारी दी गया है कि कथित 90 हजार रुपये की रकम में से 10 हजार रुपये कार वॉश सेंटर में ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से दिए गए। शिकायतकर्ता ने इस भुगतान की भी पड़ताल कराने की मांग की है। पहले भी शिकायत का किया गया दावा शिकायत में आबकारी आरक्षक पीताम्बर चौधरी के नाम से दर्ज मोबाइल नंबर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके खिलाफ पूर्व में भी लेन-देन से जुड़ी शिकायत कलेक्टर के समक्ष की जा चुकी है।

पुलिस एवं प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

प्रशासन व पुलिस की कार्रवाई: शिकायतकर्ता ने इस मामले की भी तफ्तीश की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने स्वयं को गरीब परिवार का बताते हुए दर्ज कराया है कि वह रोजी-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। उसका आरोप है कि आबकारी विभाग की कथित धमकी के चलते उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। अवैध महुआ शराब को लेकर भी सवाल प्रकरण सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जिला मुख्यालय के आसपास के कई गांवों में अवैध महुआ शराब की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शोहगपुर, गजईपुरी, बेहराबुड़ा, कोदोबत्तर, नागाबुड़ा, कोड़ोहरदी, बम्हनी, पेंड्रा, खट्टी, पंडरीपानी, पारागांव और हसोदा जैसे क्षेत्रों में अवैध शराब की गतिविधियां होने की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन आबकारी विभाग केवल यंहां वसूली करने जाता हैं या उनके कर्मचारी वसूली कर पैसा पहुंचाने का काम करते है।

वर्तमान स्थिति व दिशा-निर्देश: विभाग कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं करता या कभी -कभी कार्यवाही कर केवल औपचारिकता निभा दी जा रही हैं। बता दे कि इससे पहले भी आबकारी विभाग के अधिकारी बनकर वहां के कर्मचारियों द्वारा शराब बनाने के झूठे केश में फ़साने की धमकी देकर अवैध वसूली की शिकायत आते रही है फिर भी आबकारी विभाग के जिला स्तर के अधिकारी के चुप्पी से अवैध वसूली में उनकी संलिप्तता स्पष्ट झलकती है। तफ्तीश में कॉल डिटेल और भुगतान की हो तफ्तीश मामले में लगाए गए आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरी तस्वीर तफ्तीश के बाद ही स्पष्ट होगी। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच प्रशासन के साथ पुलिस प्रशासन स्तर पर भी कराई जाए और संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, ऑनलाइन भुगतान तथा अन्य वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जाए। अब निगाह इस बात पर है कि कलेक्टर के समक्ष पहुंची इस शिकायत पर प्रशासन क्या धरपकड़ करता है और छानबीन में 90 हजार रुपये लेने तथा धरपकड़ की धमकी देने के आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है।से जुड़ने के लिए।